हौसला, जिंदगी का नाम है दूसरा,
जो मिल गया मौज कर, भूल जा जो खो गया।
पल में जीना सीख ले, भूल जा कल की फिक्र,
झूम जा, झूम जा, तू खुशी में झूम जा।
तू ज़रा ये बता, क्या है तेरे गम की दवा
कुछ नहीं, कुछ नहीं, तू जरा सा मुस्कुरा।
क्यों समझता है कि तेरे पास कुछ भी नहीं
देख नजरें खोल के, सामने जमाना खड़ा।
मुट्ठी मे सितारे तेरे, पैरों तले है आसमां
कर के जरा हौसला, कदम आगे तू बढ़ा।
कामयाब होना है तो बात ये जान ले
छोड़ बात गैरों की, खुद से तू नजर मिला।
भारत मल्होत्रा
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सोमवार, 16 मार्च 2009
बुधवार, 28 जनवरी 2009
आओ बैठो जरा दो बातें करो...
भारत मल्होत्रा
आओ बैठो जरा दो बातें करो
कभी अपनी कहो, कभी मेरी सुनो
तुमको देखकर मुझको होता यकीं
तुमको पहले मैने देखा कहीं
तेरी ही सूरत मेरे दिल में बसी
तुम आओ तो जीवन में आए खुशी
अपने कदमों से दुनिया ये रोशन करो
मेरे जीवन से दूर अंधियारा करो,
आओ बैठो जरा दो बातें करो,
कभी अपनी कहो, कभी मेरी सुनो।
राह तेरी मैं हरपल देखा करुं
तेरी यादों के धागों से सपने बुनूं
तुम पाऊं ये मेरी है कामना
मेरे मन की है तेरी अराधना
तु ही मेरी खुशी, तुम ही मेरी हंसी
तु ही मेरे जीवन के कण कण में बसी
तुम भी कभी मुझको नयनों में भरो
पूरी मेरी कभी तो यह कामना करो
आओ बैठो जरा दो बातें करो
कभी अपनी कहो, कभी मेरी सुनो
आओ बैठो जरा दो बातें करो
कभी अपनी कहो, कभी मेरी सुनो
तुमको देखकर मुझको होता यकीं
तुमको पहले मैने देखा कहीं
तेरी ही सूरत मेरे दिल में बसी
तुम आओ तो जीवन में आए खुशी
अपने कदमों से दुनिया ये रोशन करो
मेरे जीवन से दूर अंधियारा करो,
आओ बैठो जरा दो बातें करो,
कभी अपनी कहो, कभी मेरी सुनो।
राह तेरी मैं हरपल देखा करुं
तेरी यादों के धागों से सपने बुनूं
तुम पाऊं ये मेरी है कामना
मेरे मन की है तेरी अराधना
तु ही मेरी खुशी, तुम ही मेरी हंसी
तु ही मेरे जीवन के कण कण में बसी
तुम भी कभी मुझको नयनों में भरो
पूरी मेरी कभी तो यह कामना करो
आओ बैठो जरा दो बातें करो
कभी अपनी कहो, कभी मेरी सुनो
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